बॉलकनी वाला फ्लैट

वो जब मुंबई आई तो किराए का १ कमरे वाला फ्लैट था. मुम्बइया भाषा में कहें तो ‘टूटेला फूटेला’. बिस्तर बिछा दो तो मेज नहीं रख सकते, मेज रख दो बिस्तर नहीं आता. खैर,

वे आपस में एक दूसरे के पूरक थे

Complementary Relationship पहले को खाने के लिए कमाना आता था, दूसरे को खाना बनाना आता था. पहले में कुछ गुण थे, दूसरे में दूसरे कुछ गुण थे, वे गुण आपस में एक दूसरे के

इस बैग की एक कहानी है

इस बैग की एक कहानी है कहानी जून 2018 की है. कहानी ताजी है. लड़के के मम्मी पापा व लड़की की मम्मी पापा का बातचीत के लिए मिलना तय हुआ, 22 जून को. लड़के

हम और हमारा समाज

हम और हमारा समाज हमसे समाज बनता है । यह बाद की बात है । इससे पहले की बात जानना व मानना जादा जरूरी है कि हम समाज से बनते हैं । हम समाज

गाँव की प्यारी बातें

गाँव की प्यारी बातें मैं आँख बंद किए खटिया पर लेटा था. सुबह के 8 बजे थे. छोटे भाई की पत्नी पूजा, धीमे धीमे किसी छोटे बच्चे से बात कर रही थी – भैया

यही प्यार मुझे पसंद है

मुंबई से अमेठी पहुंचे । गांव से छोटा भाई आया । प्लेटफॉर्म पर आते ही भाई ने कोई सामान लटकाया, तो कोई सिर पर रख लिया । – अरे, ये क्या, तुम तो सारा

जब आप मंदिर जाएं मंदिर परिसर में कुछ देर जरूर बैठें

जब आप मंदिर जाएं तो दर्शन करने के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर जरूर बैठें, दर्शन का ध्यान करें, प्रार्थना करें कि हे ईश्वर – अनायासेन मरणं – give me death without pain

मैंने तीन बातें सीखी

कल मैं ऑफिस के लिए chair खरीदने गया. दूकान बड़ी थी, नाम था फर्नीचर-सेंटर. कुर्सी देखी. चुनी. मोल भाव होने लगा. वो 5000, मैं 3000 😀 – नही, नही 3 नही हो पाएगा, हम जानते

Don’t be Overqualified 

ग्रेजुएशन किया था, कुछ काम नही मिला, मास्टर्स कर लिया, तबो काम नही मिला, पीएचडी कर लिया, अबो काम नही मिल रहा, एम्प्लायर कह रहे हैं कि over qualified हो गए हो 😀😕😀 सबक :

Advice to Parents

पैरेंट्स के लिए आजकल रिजल्ट आ रहे हैं. बच्चों के 80-90 % मार्क्स देखकर पेरेंट्स गदगद हो जा रहे हैं. ऐसा होना स्वाभाविक भी है. उनके जमाने में 60-70 बहुत होता था. इसलिए 80-90
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