सुख का मंत्र : आत्म निर्भर : Self Dependent :

जब मेरे बड़े मित्र भाई शर्मा जी, 65+, मिले तो बोले कि मैं आज कल बड़ा सुखी हूँ, मैंने बच्चों व बहुओ को बोल दिया है कि मैं अब self dependent हो गया हूँ । आप मेरी चिंता न करें । और मुस्कराने लगे ।

विनोदी स्वाभाव के डॉ. शर्मा जी, IIT मुंबई alumni, सिविल इंजीनियरिंग expert, की बात सुनकर मुस्कान आ गई और ज्ञान भी आ गया ।

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युवा भी सेल्फ डिपेंडेंट बने और बड़े भी यथा संभव सेल्फ डिपेंडेंट रहें । अधिकतर समस्यायों की जड़ निर्भरता है, डिपेंडेंसी है । बदलते समय में  डिपेंडेंसी बोझ स्वरुपा हो चुकी है । वैसे तो हम सभी किसी न किसी पर निर्भर हैं, कोई नहीं तो प्रभु पर निर्भर हैं, फिर भी जितना हो सके उतना आत्म निर्भर होना चाहिए । इस में सुख भी है और सम्मान भी ।

आत्म निर्भर रहें । खुश रहें । सुखी रहें ।

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