उसे छू लो

जो खुशी छूने में होती है, वो कहीं और नहीं. पत्तो को छुओ. फूल को छुओ. बहुत अच्छा लगता है. बच्चे को छू कर देखो. बहुत प्यार मिलता है. बचपन में रहस्य पता न था, पकड़ा पकड़ी खेलते थे, छू कर भागते थे, बड़ा मजा आता था. ज्यों ज्यों बड़े होते गए, सीमाओं में बंधते गए. छूने के मतलब बदलते गए. छूना कम होता गया. हम पिंजरे में बंद होते गए.

बोलना जरुरी नहीं है. कुछ मत बोलिए. छू कर आप बहुत कुछ बोल देते हैं. मुझे याद है जब मैंने उसे पहली बार छुआ था. मत पूछो क्या हुआ था. मैंने बिन बोले बहुत कुछ बोल दिया था और उसने बिन सुने बहुत कुछ सुन लिया था. आज भी हम दोनों भावुक हो जातें हैं वो याद कर के.

किसे कब छुएं, कहां छुएं, कैसे छुएं, कितना छुएं इस पर लिखूंगा तो पुस्तक लिख उठेगी. इसलिए यहां सारी बात नहीं लिखूंगा. बस इतनी बात समझिए कि बच्चों के गाल छूने से प्यार मिलता है, मित्र का हाथ छूने से साथ मिलता है और बड़ों के चरण छूने से स्वर्ग मिलता है.

और उसे ? उसके दिल को छुओ. दिल से. प्यार से. भावुक हो कर.

उसे छू लो.

जिंदगी मुस्कराने लगेगी. 

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