वो बहुत भोली थी

वो बहुत भोली थी ।

छठी में मैं पढ़ता था. City Montessori School लखनऊ में. स्कूल अच्छा था और अपने बच्चों को स्कॉलरशिप की तैयारी करवाता था । मैंने भी स्कॉलरशिप की तैयारी की और परीक्षा लिखी । पास हो गया । अगले साल सातवीं में परीक्षा का अगला चरण भी पास कर लिया । आठवीं में बिरला विद्या मंदिर, नैनीताल पहुंच गया । भारत सरकार का कृतज्ञ हूं कि उसने 100% वजीफ़ा दिया । पॉकेट मनी तक दिया । बड़ा नाम हो गया । शहर से गावं और गावं से शहर, सब तरफ लोग बात करने लगे । मिश्रा जी का लड़का famous हो गया ।

उसके बाद की बात आप समझ गए होंगे । उस समय हर पिता अपनी बेटी के लिए अच्छा लड़का कम उमर से ही ढूँढने लगता था । मैं शायद दसवी में था । 1981 की बात है । पांडे जी (उसके पापा) मिश्रा जी (मेरे पापा) से मिले । क्या बात हुई किसी को नहीं पता । पर पांडे जी जब अपने घर गए तो कैमरे की खींची फोटो नहीं ले गए, अपने दिल की खींची फोटो ले गए । और वहां सभी को वही फोटो बता दी । दिल तो दिल होता है । अच्छे को बहुत अच्छा बोलता है । प्यारे को बहुत प्यारा बोलता है । पांडे जी के दिल ने बोल दिया । उनके घर के सभी लोगों ने बड़े कौतूहल से सुना । और सभी फ़िदा हो गए । वो लड़की भी जो छुप के सब सुन रही थी । रेनू नाम था । बड़ी भोली थी । जाने कौन सी छवि बना ली उसने अपने मन में । और प्यार कर लिया उसे छवि से ।

lovely innocent

समय बीतता गया । मैं 12वीं पास हो गया । BITS पिलानी से इंजीनियरिंग पास कर ली । चार पांच साल नौकरी कर ली । पांडे जी आते रहे । मिश्रा जी से मिलते रहे । दिल से फोटो खींच कर ले जाते रहे । दिल की बात अपने घर में बताते रहे । और वो छुप छुप के सुनती रही । छवि बनाती रही । उसे प्यार करती रही । 10 साल बीत गए । इस बीच कई रिश्ते आए । कुछ स्वतः वापस चले गए । कुछ उसने वापस कर दिए । एक तरफा प्यार था यह । न हम कभी मिले थे, न बात चीत, न फोन । मोबाइल वगैरा तो था ही नहीं । उसने अपने मन में बनाई छवि और उसने उस छवि से किया प्यार ।

1992 की बात है । मैं मुंबई से घर गया तो माँ ने बताया कि शादी तय हो गई है । पांडे जी की लड़की से । मैंने कहा कि माँ मुझे बताना तो था । माँ बोली कि उन्होंने लड़की देखी और ना कर दिया पर उसके मामा कह रहे हैं कि लड़की जिद कर के बैठी है, अब या तो हाँ होगी या अंत हो जाएगा । हम चुप हो गए । जब दोनों माँ राजी हो गई, दोनों पापा राजी हो गए, और लड़की तो अंतिम हद तक राजी थी, तब बेचारा लड़का क्या बोलता । चुप हो गया । और चुप होने को हाँ मान लिया गया । तब ऐसे ही होता था । मौन ही स्वीकृति होती थी ।

न मैंने उसे देखा, न उसने मुझे । शादी हो गई ।

आज वो मायके गई है । वहां उसे मेरी 1991 की फोटो मिली । शादी से पहले उसके पापा ले गए थे । मेंरी बेटी ने whatsapp पर भेजा । कहा कि पापा इस फोटो की कहानी बताओ । सो बता दिए । और एक बात बता दें । हंसी मजाक अलग बात है, पर दिल की बात यह है कि दिल की बातें प्यारी होती हैं और अगले जनम तक चलती हैं ।

भले ही हम पुराने जमाने के हों पर इतना तो बनता ही है –

Love you darling.

अरुण मिश्र


Disclaimer : Photo image taken from Google for story illustration only.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share