कैसे बना शिक्षक ?

इंजीनियरिंग करने के बाद एक छोटी से नौकरी कर रहा था. Software programmer था । एक दिन हेगड़े साहब ऑफिस आए । बात बात में बोले – अरे अरुण, तुमने तो Pascal programming पढ़ा है । मेरी बेटी इंजीनियरिंग कर रही है । उसे पढ़ा दो । साथ में यह भी बताया कि पिछले exam में यह subject रह गया था । ट्यूशन क्लास लगाया तो उसे भी छोड़ दिया । तुम जरा try करो । I know, you can do it. मैं क्या बोलता. मैंने बोला ठीक है भेज दीजिए ।

लड़की लंबी थी । पतली थी । मुंबइया थी । फिल्मी looks थे । इंजीनियरिंग डिग्री का दूसरा साल था । उमर आप guess कर सकते हैं । Fatal attraction के लिए इतना काफी था । खैर, हमने मन को कंट्रोल किया । चुपचाप सीधे तरीके से Pascal पढ़ाया.

दो तीन महीने बाद फिर से हेगड़े जी मिले । बड़े खुश । बोले – अरे अरुण, तुम तो बड़े अच्छे टीचर हो । बेटी अच्छे से पास हो गई । एक काम करो । जिसमे अच्छे हो वही करो । You become Lecturer. मैंने पूछा – कैसे ? कुछ बोले नहीं. तुरंत फोन लगाए । बोले – मिस्टर कुलकर्णी, अरुण को भेज रहा हूँ, जरा देख लेना । कुलकर्णी साहेब उस समय Aptech में GM थे । बोले – जाओ, पास में उनका घर है, मिल लो । मैं अभी भी इंजीनियरिंग 4th year की dress में ही था – गंदी जींस और चप्पल । मुझे सकुचाता देख बोले – कोई बात नहीं, सारे इंजीनियर ऐसे ही रहते हैं, जाओ, कुलकर्णी मेरा दोस्त है, वो भी ऐसा ही है, don’t hesitate, GO.

मैं गया । मिला । अगले दिन उन्होंने ऑफिस में बुलाया । अपनी टेबल पर चाय पिलाई और अपॉइंटमेंट लेटर हाथ में दे दिया । और मैं शिक्षक बन गया ।

आगे की कहानी इतिहास है । इस ‘कैरियर ब्रेक’ के बाद सफ़र लगातार आगे बढ़ता रहा । St. Xaviers, Lokmanya Tilak, DY Patil, Bharti Vidyapeeth, IGNOU और न जाने कहाँ कहाँ पढ़ाया । नवी मुंबईमें 15 इंजीनियरिंग कॉलेज है । लगभग सभी में कभी न कभी visiting lectures लिए होंगे । करीबन 5000 या उससे जादा लोगों को प्रोग्रामिंग और मैनेजमेंट पढ़ाया होगा । सभी बच्चों से बहुत बहुत प्यार मिला । और उस प्यार ने अपने में बांधे रखा । जकड़ कर बांधे रखा ।

एक दिन तय कर लिया कि अब मैं आजीवन education and counselling करूंगा । दूसरा कुछ नहीं करूंगा । मैं शिक्षा से ही जुड़ा रहूंगा । शिक्षा की चादर में लिपटे हुए जाऊंगा ।


1. Thank you Sir, Mr. S. B. Hegde Patil, Juhu Vileparle, Mumbai 

 

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