हाँ देखा है मैंने

हाँ देखा है मैंने…….
देहरादून के रास्ते जाते हुए
उगते सुनहरे सूरज का गोला
जो पेड़ों के बीच से झाँकता था मेरी ओर

फिर देखा …
सर पर नीला धुला आसमान
ज़मीन पर बिछी हरे घास की चादर
सुनहरी नहर का लहराता दुपट्टा भी देखा

फिर देखा ……
देहरादून के आसमान पर फैला बादलों का काजल
गिरतीं काँच की बूँदें
और गिरते देखा
टप्प से सूरज का गोला….

देखा मैंने …..
उड़ते -फिरते बादल
हज़ार टन हरियाली
एक ही पेड़ पर सैकड़ों आम
ढेर लटकते कटहल
और देखा पहाड़ी रास्ता ….
मैंने सब कुछ देखा….

सच कहूँ …. मैंने कुछ नहीं देखा …..
देखा …. तो सिर्फ पहाड़
बहुत ऊँचे देहरादून के पहाड़
आसमान को छूते पहाड़
वहाँ मैंने माउंट एवरेस्ट देखा
जो आ गया था कहीं से चल कर
मेरे और उसके बीच में

यकीन मानो ….
मैंने उस दिन सिर्फ पहाड़ देखा

पहाड़ी रास्ते से उतरते हुए
मुझे मिली थी पाँच बकरियां…..
बकरियों ने देखा है मुझे
मुड़-मुड़ कर पहाड़ देखते हुए ………….

Ruchi Bhalla

Comments
  1. shalini | Reply

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