विश्वकर्मा पूजा

जब छोटा था तब गावं के लोहार के काम को बड़े ध्यान से देखता था । सोचता था कि ये ऐसा कमाल कैसे कर लेता है । बढ़ई मेरे को गुल्ली डंडा बना कर देता था । 5 मिनट में बना देता था । मैंने उसे दरवाजा बनाते देखा । चारपाई बुनते देखा । मैं उसके औजार देखता रहता था । और ये देखता रहता था कि वह उन औजारों को कैसे बखूबी चलाता था । कुम्हार को भी देखा । उसका चक्का मस्त घूमता था । और उसमे से अचानक सुराही निकलती थी । जूता सिलने वाला मोची जिस खूबी से जूता सिलता था वह तारीफे काबिल था । घर बनाने वाले मिस्त्री की तो बात ही खास थी । इतना बड़ा और सुंदर घर खड़ा कर दिया उसने । वाह । मैं सोचता था कि इतना हुनर इन सब को कैसे मिला । उन्होंने बताया कि सब भगवान विश्वकर्मा जी की कृपा है ।

आज भगवान विश्वकर्मा जी से प्रार्थना है कि जिस तरह उन्होंने इंद्रलोक सजाया, धरती सजाई, कौरव पांडव की नगरी बनाई, द्वारिका बनाई … उसी प्रकार आज भी संसार को सुंदर बनाएं, सभी को हुनर दें, कला दें, कुशलता दें, सफलता दें ।

प्रगति तभी होगी जब हमारे बढई लोहार धोबी मोची मिस्त्री मजदूर कारीगर मशीन चालक उद्योगी इंजीनियर आदि सभी हुनरमंद होंगे, अपने अपने काम में कुशल होंगे, निपुण होंगे ।

हे ईश्वर
सभी को अपने अपने क्षेत्र में निपुण करें ।

अरुण मिश्र

( विश्वकर्मा ) ( इंजीनियर )

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