मुबारक ईद आयी है दुआ तो कीजिये…

यूँ तो माफीनामा हाज़िर है ले ही लीजिये,
सजा कोई मुक़र्रर है तो दे ही दीजिये …

खता मेरी अदा कुछ आप की भी कम न थी,
ये गुस्सा छोड़ कर थोड़ा तो पानी पीजिये …

इरादा तो न था दिल आप का तड़पाने का,
अगर मुमकिन हो तो थोड़ी सजा कम कीजिये…

सबक अच्छा सिखाया आप ने हम को अभी,
मनाएं आप को कैसे सिखा ही दीजिये …

अरे! ये खेल अब चलता रहे सारी उमर,
मुबारक ईद आयी है दुआ तो कीजिये…


 

Yun to mafinaama haazir hai le hi lijiye,
Saja koi mukarar hai to de hi dijiye…

Khata meri ada kuchh aap ki bhi kam na thi,
Ye gussa chhod kar thoda to paani peejiye…

Iraada to na tha dil aap ka tadpaane ka,
Agar mumkin ho to thodi saja kam kijiye…

sabak achcha sikhaya aap ne hum ko abhi,
Manayen aap ko kaise sikha hi dijiye…

Are ! ye khel ab chalta rahe saari umar,
Mubarak id aayi hai dua to kijiye …


लेखिका  /  कवित्री
Neelam Madiratta

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