राजनैतिक मित्र को पत्र

मकरंद भाई, आप की बात अलग है. आप प्रत्यक्ष या परोक्ष राजनीति में एक्टिव हैं. इसलिए आपकी विचारधारा पुर्णतः किसी एक दल से बंधी होगी. चूँकि हम राजनीति में नहीं है इसलिए हम आप की किसी बात का सीधा विरोध या समर्थन नहीं करते. हाँ, भाई के तौर पर प्यार हमेशा करते हैं. आपकी जिन बातों से हम सहमत नहीं होते, उन बातों को ignore कर देते हैं, पर आपको इग्नोर नहीं करते, आप को दिल में रखते हैं.

हमने इंदिरा जी का समर्थन किया, संजय जी का किया, राजीव जी का किया, सोनिया जी का किया और राहुल जी का भी समर्थन किया. हमारे क्षेत्र अमेठी के ये नेता है. हमारे बड़े नाना जी अपने इलाके के कट्टर दबंग कांग्रेसी थे.

पर वही बात सही, जो आपने कही – “जो मानव अपनी निंदा सुन लेता है वो सरे जगत पर विजय प्राप्त कर लेता है”. बस यही हुआ.

२००२ से कांग्रेस व अन्य ने एक आदमी की निंदा शुरू कर दी. इतनी की, इतनी की, कि जनता में उसके प्रति सहानभूति जगने लगी. सहानभूति से वह उठने लगा और निंदा करने वाले गिरने लगे. जब गिरने लगे तो निंदा को और निंदनीय कर के प्रहार तेज कर दिया. फिर क्या, सहानभूति और जादा बढ़ने लगी, निंदक और जादा गिरने लगे.

मजेदार बात देखिए. उसे भी यह थ्योरी पता है. इसलिए जब कोई निंदा करता है तो वह चुपचाप सुनता है, सहता है, बिना जबाब दिए, लोगों में सहानभूति उठती है, और वह आनंद लेता है. आज तक. अभी तक.

अब इसमें उसका क्या कसूर ?

हमारा भी क्या कसूर 😀 हम राजनेता नहीं हैं. जनता हैं. हममें भी वही भावनाएं हैं जो आम जनता में हैं. हममें भी सहानभूति है.

आप सब जानते हैं. आप यह थ्योरी भी जानते हैं. आप जानते हैं कि कांग्रेस या विपक्ष को उसकी निंदा छोड़ कर जनता के लिए सकारात्मक काम करना चाहिए. जन सेवा करनी चाहिए. जैसे कि लाइन में लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए. गाँव जाकर लोगों को डिजिटल सिखाना चाहिए. डिजिटल ट्रेनिंग कैंप खोलने चाहिए. उसे कहना चाहिए कि – पीएम ने जो किया सो किया, जनता , आप हमारे पास आइए, अब हम आप को पार लगाएंगे. दिल जीतने वाले काम करने चाहिए.

मैं जानता हूँ कि आप मेरी इन सब बातों से सहमत हैं. शतप्रतिशत. लेकिन आप की अपनी विवशताऐ हैं. इसलिए आप शांत हैं.

मैं सरेमहफिल कहता हूँ, कांग्रेस ऊपर आ सकती है, अगर अच्छे लोग ऊपर आने दिए जाएं.

जिन्हें भाषण देना नहीं आता वो माइक पकड़ कर खड़े हैं. जिन्हें केवल गाली देना आता है या लड़ना आता है वो टीवी पर चर्चा में भाग ले रहे हैं, प्रवक्ता बन कर. यह बदलना पड़ेगा. शांत आदमी को चर्चा में रखिए. बीजेपी वाला अगर गाली देता है या आरोप लगाता है तो शांति से सुन ले और दो लाइन साधू जैसे प्रेम के बोले. चिल्लाए नहीं. अपनी भविष्य की योजना बताए और बीजेपी या दूसरे के उकसावे में नहीं आए, शांति से नमस्कार कर के प्रेम के बोले. आप देखिएगा – सहानभूति का पलड़ा पलट जाएगा. बदलाव चाहिए. स्वयं में, स्वयं के बर्ताव में, स्वयं के आचारण में, स्वयं के उत्तर प्रतिउत्तर में. यह बदलाव दिखना चाहिए. जो दिखेगा वो असर करेगा. असर दूर तक करेगा. यह बदलाव इतना बड़ा होगा कि सत्ता बदल जाएगी.

आप सब जानते हो भाई.

मैं मूरख आप को बताऊँ यह ठीक नहीं होगा.

मेरा प्यार, मकरंद.
अरुण
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