केवल पिताजी ही पूछते थे

केवल पिताजी ही पूछते थे – काम कैसा चल रहा है बेटा ।

6 माह हो गए, सब अपनी सुनाते रहे, बिन हमारी सुने बस अपनी ही सुनाते रहे, और हम सुनते रहे । उन्होंने हमें सिखाया था कि घर के बड़े को सबकी सुननी चाहिए, खासकर सबके दुःखों को । आपका सिखाया हम निभा रहे थे ।

6 माह बाद आज सपने में पिताजी आए । कुछ कुछ बातें की । अंत में पूछे – काम कैसा चल रहा है बेटा । मैंने भी हमेशा की तरह जबाब दिया – ठीक चल रहा है । पिताजी परेशान न हों इसलिए उन्हें हमेशा अच्छा ही बताया, फायदा हुआ तब भी, घाटा हुआ तब भी । फिर भला आज सपने में कैसे बताता कि काम मंदा चल रहा है । इसलिए वही जबाब दिया – ठीक चल रहा है ।

वो मुस्कराए । कुछ कुछ बताए, फिर बोले कि – बेटा, मुझे उस बिल्डिंग के पास पहुंचा दो । मैंने उन्हें वहां ले गया । उसके दरवाजे के पास वो रुक गए और बोले अब तुम जाओ ।

मैं दुःखी हो गया । अभी तक मेरी निद्रा अर्ध जागृति हो गई थी । मैं समझ गया था कि मैं सुबह का सपना देख रहा हूँ । मैं जगना नहीं चाहता था । उनको छोड़ना नहीं चाहता था । पर वो ओझल हो गए । मैं देखता रह गया ।

मैं बहुत प्यार करता हूँ आप को बाबू जी । आज भी. Love You.

अरुण 💐💐 💐💐

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