लेखन में दिल कैसे जीता जाता है ?

लेखन में दिल कैसे जीता जाता है ?

यह बहुत सरल कला है । कुछ बातों का ध्यान रखिए और बात बन जाएगी ।

1. पाठक वर्ग – किसके लिए लिख रहे हैं, उसे समझिए, उसकी पसंद को समझिए, उसके taste को जानिए, अपने लेखन में उन बातों का ध्यान रखिए । अपने पाठक का मन लिखिए, अपने पाठक का दिल लिखिए ।

2. चुटकुले, हास्य, व्यंग आदि चाट की तरह होते हैं । चाट सभी को अच्छी लगती है । पर समय पर । सीमित मात्रा में । बेसमय चाट अच्छी नहीं लगती । असीमित चाट नुकसान करती है । अच्छी चाट परोसिए । लोगों को अच्छा लगेगा । सावधान रहिए, रोज चाट का ठेला मत लगाइए अन्यथा आप ‘चाट वाले भइया’ बन जाएंगे 😀😀

3. मीठा खाने से शुगर बढ़ सकता है पर मीठा लिखने, मीठा बोलने, मीठा सुनने व सुनाने से शुगर घटता है । मीठा लिखिए ।

4. पॉजिटिव बातें सब को अच्छी लगती हैं । सकारात्मक लिखने व पढ़ने से मस्तिष्क अच्छा होता है, अच्छे विचार आतें हैं, ऊर्जा मिलती है और जीवन को गति मिलती है । मेरी दादी कहती थी – बेटवा, अच्छी बात से मूड़ अच्छा होता है, मेरी बेटी कहती है – अच्छी बात से मूड अच्छा होता है । मूड़ और मूड में जनरेशन गैप है, पर यह तो तय है कि सकारात्मकता से कुछ तो अच्छा होता ही है । पुरानी बूढ़ी अम्मा भी यही कहती हैं । अविरल बहती सरिता भी यही कहती है और हरी भरी प्रकृतिमयी वसुंधरा भी यही कहती है ।

5. आशावाद लिखिए । आशावाद से जीवन में दीपक जलता है, उजाला होता है । निराशावाद अक्सर दीपक बुझा देता है । आशा ही जीवन है । सभी सफल लोग आशावादी होते हैं । जहां आशा है, वहां सफलता है ।

6. शुभ लिखिए । अशुभ कभी मत लिखिए । शुभ लिखिए, शुभि लिखिए, शुभम् लिखिए । कल्याण होगा ।

7. प्रेम लिखिए । हमेशा वो वाला प्रेम ही मत लिखिए, लोग बोर हो जाएंगे, कभी कभी ये वाला प्रेम भी लिखिए । ईश्वर का प्रेम, भाई बहन का प्रेम, माता पिता का प्रेम, समाज व देश का प्रेम लिखिए । अच्छा लगेगा ।

8. छोटे वाक्य लिखिए । आजकल यही फैशन है ।समय के साथ चलिए । छोटे वाक्य और सरल शब्द सब को अच्छे लगते हैं । छोटे वाक्यों में कमल खिलाइए ।

9. सच लिखिए पर सच के नाम पर कड़वा मत लिखिए । मेरा एक मित्र है, कहता है कि – मैं सच लिखता हूँ, पर स्थान और समय के मुताबिक लिखता हूँ । सुबह लिखता हूँ कि सूरज निकलने वाला है और शाम को सूरज अस्त हो रहा है नहीं लिखता, बल्कि लिखता हूँ कि चांद निकलने वाला है । आप भी सच का सौरभ बनाइए, जिसमें सच के फूल खिले हों ।

आज इतना ही । बाकी फिर कभी ।

ये नुस्खे अपनाएं । लेखन में आप दिल जीत लेंगे । हमारा भी, उनका भी 😀

सभी को प्यार
अरुण

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