अपनी पसंद का काम करें

युवाओं के लिए

युवाओं को अपने मन का काम ढूंढ़ना व करना चाहिए. जब वो दसवीं पास करते हैं तब उनकी उमर 15 साल की होती है. अपना भविष्य सोचने व decide करने के लिए यह उमर बहुत छोटी होती है. इस उमर में अधिकतर बच्चे फैसले अपने माँ बाप भाई बहन व दोस्तों की बातों के प्रभाव में लेते हैं. 11-12th के लिए, साइंस कॉमर्स या आर्ट्स विषय का चुनाव भी परिवार व मित्रों से प्रभावित होता है. ग्रेजुएशन का आधार 12वीं होता है. 12वीं में लिए विषय के आधार पर वो ग्रेजुएशन की तरफ बढ़ जाते हैं. 21 वर्ष की उम्र में, ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, थोड़ा बहुत काम करने के बाद, उन्हें मालूम पड़ता है कि, पिछले 6 साल से, उन्हें जलेबी पसंद थी पर वो समोसा खा रहे थे.

अब क्या करें ? अगर समोसे का टेस्ट develop हो चुका है तो continue रखें. अगर नही हुआ है तो बदल दें, अपने टेस्ट की चीज खाएं. अपने टेस्ट, अपने लगाव, अपने हुनर, अपने जिगर का काम करें. जी हां, आजकल हुनर के साथ साथ, जिगर भी जरूरी है. जैसा जिगर हो वैसा काम करें. सॉफ्ट वर्क, एडमिन वर्क, ऑफिस जॉब, बाहरी काम, भाग दौड़ का काम, हार्ड वर्क, मेहनत का काम, मशीन का काम, भारी काम … आदि अपने हुनर व अपने जिगर के अनुसार चुनें. अपनी पसंद को सबसे ऊपर रखें. पैसे से भी ऊपर अपनी पसंद को रखें.

मैं फिर से लिख रहा हूँ –

पैसे से भी ऊपर, अपनी पसंद को रखें, काम में भी, जीवन में भी.

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