हम और हमारा समाज

हम और हमारा समाज

हमसे समाज बनता है । यह बाद की बात है । इससे पहले की बात जानना व मानना जादा जरूरी है कि हम समाज से बनते हैं । हम समाज में जन्म लेते हैं, बचपन बिताते हैं, खेलते कूदते हैं, शिक्षा पाते हैं, बड़े होते हैं, किसी लायक बनते हैं । लायक बनने तक कि यात्रा में समाज का योगदान होता है । इस दौरान समाज हमें पालता पोसता है, चलना फिरना उठना बैठना सिखाता है, कई बार प्रत्यक्ष व कई बार आर्थिक मदद भी करता है । घटना दुर्घटना के वक्त हमारे साथ खड़ा होता है । अच्छे बुरे वक्त हमारे साथ खड़ा होता है । उसका साथ में खड़ा होना हमें बल देता है, शक्ति देता है ।

कुछ लोग ऐसा नही मानते, वे समाज के योगदान को नही स्वीकारते, उन्हें लगता है कि समाज का उनके जीवन में कोई योगदान नही रहा । ऐसे लोगों को मैं कहता हूँ कि अगर समाज का उनके जीवन में कोई योगदान नही रहा है तो वो गाँव से दूर जंगल में अपना घर बना लें । तब उन्हें एकाकीपन व असुरक्षा दिखाई देती है । तब उन्हें लगता है कि वो सामान कहाँ खरीदेंगे, कपड़ा कहाँ सिलवाएँगे, अन्य सुविधाएं कैसे पाएँगे । तब उन्हें योगदान की विस्तृत परिभाषा समझ में आती है ।

अगर समाज हमें कुछ देता है तो हमें भी समाज को कुछ देना चाहिए । मान सम्मान देना चाहिए, अपनी उपस्थिति देनी चाहिए, अपनी सहभागिता देनी चाहिए । हो सके तो समाज व समाज के लोगों को रोटी कपड़ा व मकान में मदद करनी चाहिए, पढ़ाई लिखाई शिक्षा, हुनर, ज्ञान में मदद करनी चाहिए, बिमारी अस्पताल इलाज में मदद करनी चाहिए । मदद का रूप अलग अलग हो सकता है । कोई रास्ता बता कर मदद कर सकता है, कोई पानी पिला कर मदद कर सकता है, कोई धन से मदद कर सकता है, कोई किसी के मुश्किल वक्त में साथ खड़ा होकर मदद कर सकता है । सही जानकारी देना, प्रोत्साहन देना, किसी काम के लिए किसी से किसी की सिफारिश करना, जरूरत पड़ने पर सुरक्षा देना आदि भी मदद करना होता है । कुछ लोग विद्यालय बनवाते हैं, कुछ लोग पूरा विद्यालय नही बनवा सकते तो पंखे लगवाते हैं, कुछ लोग वो भी नही कर पाते तो अपनी एक ईंट ही रखते हैं, …. इसी तरह कुछ लोग अस्पताल बनवाते हैं, कुछ लोग उसमें उपकरण लगवाने में मदद करते हैं, कुछ लोग दवाई उपलब्ध करवाने में अपना योगदान देते हैं । समाज को मदद करना जरूरी है, मदद का रूप व मात्रा अपनी रुचि व सामर्थ्य के हिसाब से स्वयं तय करें।

यह ध्यान रखें कि आपका योगदान ऐसा हो जिससे समाज शिक्षित बने, निरोगी बने, समृध्द बने, अच्छा बने, लोग चरित्रवान बनें, लोगों में सद्भाव बढ़े, प्रेम बढ़े ।

अरुण चिंतन

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