यही प्यार मुझे पसंद है


मुंबई से अमेठी पहुंचे । गांव से छोटा भाई आया । प्लेटफॉर्म पर आते ही भाई ने कोई सामान लटकाया, तो कोई सिर पर रख लिया ।

– अरे, ये क्या, तुम तो सारा सामान लाद लिए, कुली बन गए, बैग हमें दे दो
– आप ये सब छोड़ो भैया भाभी, मेरे पीछे आओ, (और सामान ले कर भाई चल दिया आगे आगे)

न कोई शर्म है कुली बनने में, न कोई झिझक है, न कोई फॉर्मैल्टी है, न कोई लाग लपेट है, न कोई …. ।।

खुली हवा है, खुला संसार है, खुला प्यार है ।।

यही प्यार मुझे पसंद है 💐💐💐

 

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