बॉलकनी वाला फ्लैट

वो जब मुंबई आई तो किराए का १ कमरे वाला फ्लैट था. मुम्बइया भाषा में कहें तो ‘टूटेला फूटेला’. बिस्तर बिछा दो तो मेज नहीं रख सकते, मेज रख दो बिस्तर नहीं आता. खैर, उस समय और उस परिस्थिति का अलग आनंद था. हम मुम्बइया उसे ‘संघर्ष का आनंद’ कहते हैं. हम तो उस आनंद से आनंदित थे ही, शादी के बाद वो भी आ गई, साथ देने.

जब हम शाम को बाहर टहलने निकलते थे, तो साथ चलते चलते, नजर बचा के वो बड़ी बड़ी बिल्डिंग देखती थी, और उनमे से  झांकते फ्लैट देखती थी,  बॉलकनी वाले. पर बोलती कुछ नहीं थी. उसे हमारी स्थिति मालूम थी, और इन बॉलकोनी वाले फ्लैट्स की कीमत भी मालूम थी. बोलती कुछ नहीं थी, पर उसकी ऑंखें सब कह देती थी, मन सब बोल देता था, हमारा दिल सुन लेता था. दिल ने सुना, तो दिल ने वादा किया, दिल से, देने को उसे एक दिन, जो उसने देखा.

सिलसिला यूँ ही चलता रहा. समय के साथ साथ समय बदलता गया. किराए के फ्लैट से अपने 1 रूम वाले फ्लैट में गए, कुछ और समय बाद 1 BHK भी हो गया पर वो बात नहीं हुई जो वो देखा करती थी.

बढ़ते परिवार को देखकर हमने 1 BHK से 2 BHK में जाने की सोची. नया घर देखा जाने लगा. वो बात अभी भी दिल में थी. दिल में ही तो ईश्वर रहते हैं.  सुन लिए. कृपा कर दी. उनकी कृपा से कोपरखैराने, नवी मुंबई में 2 BHK बॉलकनी वाला फ्लैट हो गया.

इसी २०१८ की १५ जुलाई को हम उसमे आ गए.

आजकल वो रोज शाम को बॉलकनी में बैठती है. 

धन्यवाद प्रभु, आप के आशीर्वाद से वादा पूरा हुआ.

उसने मेरा साथ दिया, ‘टूटेले फूटेले’ में, कठिनाई में, तनाव भरे दिनों में, बिना शिकायत के, बिना बोले, आँखों में उम्मीदें लिए, मन में सपने संजोए.

इसलिए, उसे कहना बनता ही है –

‘लव यू डार्लिंग !’

 

 

 

 

 

अरुण मिश्र

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