नो दहेज़ – नो कैश – नो गिफ्ट

बहुत पहले ही तय कर लिया था – नो कैश नो गिफ्ट .

मिश्रा मिश्राइन ने बहुत पहले, जब बेटा एक साल का हुआ था तब ही, तय कर लिया था कि बेटे की शादी में न दहेज लेंगे न गिफ्ट लेंगे । नो कैश नो गिफ्ट वाली शादी करेंगे ।

क्या लड़की ढूंढ़ने में परेशानी हुई ?

जी, हुई । जब वो कहते थे कि नो दहेज या नो कैश नो गिफ्ट तो सगे वालों, रिश्तेदारों व लड़की वालों की तरफ से, दो तरह की प्रतिक्रियाएं होती थी ।

1झूठ बोल रहे हैं, आदर्शवादी बन रहे हैं, दिखावा कर रहे हैं, छोड़ता कौन है, ये भी नही छोड़ेंगे, चुप्पे से ले लेंगे ☹️

2) जरूर लड़के में या परिवार में कोई कमी होगी, इसीलिए ये लोग नो दहेज, नो कैश नो गिफ्ट, की बात कर रहे हैं ☹️

फिर क्या किया ?

मिश्रा मिश्राइन अपनी बात पर अड़े रहे । जो नही समझे उन्हें छोड़ दिया, जो समझे उनसे बात बढ़ाई ।

फाइनली जहाँ शादी हुई, वहाँ बात कैसे बनी ?

एक दिन एक लड़की की माँ का फोन आया।एक व्हाट्सअप विवाह ग्रुप से उन्हें लड़के का बॉयोडाटा मिला था । माँ ने बहुत संयम से बात की, समझदारी से बात की व बात आगे बढ़ाई । लड़की से भी फोन पर बात हुई । लड़की ने होने वाले नए मम्मी, पापा व परिवार के अन्य लोगों से फोन पर बात की । लड़के से भी बात की । लड़की शिक्षित थी, बात चीत करने में तेज थी, कॉन्फिडेंट थी, घर परिवार की बात करती थी, ये सब बातें सब को अच्छी लगी व रिश्ते की बात आगे बढ़ गई ।

मिश्रा जी ने नो कैश नो गिफ्ट वाली बात उन्हें समझा दी थी । वे उससे सहमत थे । लड़की के पापा को नो कैश नो गिफ्ट वाली बात से कुछ संशय जरूर हुआ, वो मिश्रा जी के गाँव वाले घर गए, मुंबई वाले घर आए, 2 दिन वहाँ रुके, बाद में चुपचाप कुछ और भी तहकीकात की, लड़के से अकेले में बाहर मिले, उसका कार्यस्थल भी देखा, संतुष्ट हुए तब जाकर yes बोले । लड़की, उसका छोटा भाई व माँ पहले से ही yes बोल चुके थे ?

इतनी तहकीकात, इतनी जादा तहकीकात, मिश्रा जी को खराब नही लगी, अपमान नही लगी ?

मिश्रा जी ने उनसे कहा कि आप हमें लड़की दे रहे हैं, वो यहाँ आकर रहेगी, परिवार व लड़के के संग जिंदगी गुजारेगी, इसलिए लड़की वालों को, उसके माँ बाप को, घर परिवार, लड़का, उसका काम आदि के बारे में जानने का पूरा अधिकार है । वे अपनी छानबीन व तहकीकात कर सकते हैं । यह उनका अधिकार है ।

कैसे डाला लड़की वालों ने मिश्रा जी को असमंजस में ?

अगस्त 2018 में बातचीत शुरू हुई । अक्टूबर तक लड़की, लड़की की माँ व भाई शादी के लिए सहमत हो चुके थे । लड़के का पूरा परिवार सहमत हो चुका था । पर लड़की के पिता असमंजस में थे । 3 माह का समय मांगे । लड़के वालों ने समय दिया । अपने हिसाब से फैक्ट फाइंडिंग किए । जनवरी में मकर संक्रांति के दिन फोन किए व बताए कि वो भी सहमत हैं ।

इंगेजमेंट मार्च महीने में हुआ । लड़का लड़की ने तय किया कि नवंबर में शादी करेंगे । परिवार वाले सहमत हो गए । तिलक, द्वारचार व शादी एक साथ करना 19 नवंबर को तय हुआ ।

तिलक के समय लड़की के पिता ने एक वॉच साइज बंद डिब्बे में लड़के के पिता को कुछ पैसे दिए । लड़के के पिता ने बॉक्स खोला तो देखा कि उसमें पैसे थे । लड़के के पिता ने एक दिन पहले ही लड़की की माँ को फोन करके बता दिया था, कि ऐसा कुछ न करें, नो कैश नो गिफ्ट स्ट्रिक्टली फॉलो करें । पर लड़की के पिता ने कैश देकर लड़के के पिता को, सब के सामने, असमंजस में डाल दिया, दुविधा में डाल दिया । लड़के के पिता सोचने लगे कि इसे वापस करें या न करें । वापस करने को कहीं लड़की के दादा व पिता अपनी बेइज्जती न समझें । वापस नही करेंगे तो दहेज लेना हो जाएगा, वापस करेंगे तो सामने वालों की बेज्जती व नाराजगी का डर । असमंजस में फंस गए मिश्रा जी ?

फिर क्या हुआ ?

मिश्रा जी ने तय किया कि वो पैसे वहीं वापस करेंगे । चूंकि पैसे सबके सामने दिए गए थे, इसलिए सबके सामने ही वापस करेंगे । इससे बात साफ रहेगी व समाज में साफ संदेश जाएगा ।

मिश्रा जी ने लड़की के पापा को कहा कि – ‘हमने इसे मना किया था इसलिए हम इसे नही स्वीकार सकते’ और उन्होंने पैसे का वो डिब्बा वापस कर दिया ।

कोई नाराज हुआ ?

जी, चेहरे के भाव से साफ पता चल रहा थ की लड़की के पिता को यह एक्शन अच्छा नही लगा व लड़की के दादा नाराज हुए । उन्होंने दबी जबान में दूसरों से कहा कि – अगर नही स्वीकारना था तो अकेले में वापस करते, सबके सामने वापस नही करना चाहिए था ।

फिर ?

चूंकि लड़के के पिता का फैसला व अंदाज दोनों कड़क था, लड़की वालों ने पैसे वापस ले लिए ।

क्या कोई गिफ्ट का लेन देन हुआ ?

लड़के के पापा का मानना है कि फ्रिज, TV, वाशिंग मशीन, मिक्सर, बर्तन, बेड, आलमारी आदि 1 से 2 लाख में सब कुछ आ जाता है । उसके लिए लड़के वालों को अपनी खुद्दारी व इज्जत गिरवी नही रखनी चाहिए । लड़के वालों को ये सब लेने की कोई जरूरत नही है ।

आजकल की बहुएँ रोज सुनाती हैं कि ये TV मेरे मायके से आया है, वो AC मेरे मायके से आया है । पाण्डे जी की बहू ऐसे ही सुनाती थी । कोई भी मेहमान आए उसे बताती थी । पाण्डे जी को एक दिन बहुत गुस्सा आया, सारा सामान इकट्ठा किया और माचिस लगा दिए ।

आपको ऐसा करने की कोई जरूरत नही है । नो कैश नो गिफ्ट कॉन्सेट से चलिए, गौरवांवित रहिए, खुश रहिए ।

चूंकि मिश्रा जी ने गिफ्ट वगैरा के लिए पहले ही मना किया था व तिलक में कैश वापस कर दिया था, इसलिए किसी ने कोई गिफ्ट देने की कोशिश नही की ।

परिवार को कैसा लग रहा है ?

मिश्रा परिवार खुश है कि उन्होंने जो सोचा था, जो संकल्प किया था, वैसा हुआ । मिश्रा परिवार के बच्चे इसलिए खुश हैं कि उनके मम्मी पापा ने दहेज नही लिया, नो कैश नो गिफ्ट वाला सिद्धांत अपनाया । उन्हें अपने मम्मी पापा पर गर्व है । मिश्रा परिवार इसलिए भी खुश है कि वो जैसी बहू सोचे थे वैसी बहू मिली । बहू खुश है कि उसका नया परिवार व नए मम्मी पापा उसको प्यार करते हैं । घर के बाकी सभी बच्चों की तरह, बहू को भी अपने नए मम्मी पापा पर गर्व है ।

 

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इस सत्य कहानी को लिखने का मकसद है कि समाज जागरूक हो, दहेज़ को NO कहे, नो कैश नो गिफ्ट जादा अच्छा रहेगा. परिवार, रिश्तेदार व समाज समझें. अगर लड़के वाले दहेज़ को NO कह रहे हैं तो यह अच्छी बात है, लड़के वालों को गलत न समझें, ऐसा न समझें कि परिवार में या लड़के में कोई कमी होगी इसलिए नो कहा जा रहा है. बातों को सकारात्मक तरीके से समझें. समाज को अच्छा बनाएं.
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