खबरें समाज, परिवार व रिश्तों पर चिंतन करने को मजबूर करतीं हैं। खबरें परिवर्तन करने को चीखती चिल्लाती है। खबरें कहतीं हैं कि अब हठ त्याग दो और समय के अनुसार कुछ तो परिवर्तन