Happy Family Archive

बेचारा आदमी

बेचारा आदमी गौरीगंज, अमेठी के गांव से मुंबई में आकर आदमी काम करने लगा । शादी हो गई । बच्चे हो गए । स्थिरता के लिए उसने फ्लैट ले लिया । एक दूकान ले

माँ से मिलन

माँ से मिलन … पता था कि बेटा आज आएगा । पता तो 10 दिन पहले से था पर आज माँ का मन नहीं लग रहा था । सुबह से छत पर खड़ी राह

पति को कैसे सुधारें

प्रश्न बहुत कठिन है. कौन किसे सुधारे, यही तय करना कठिन होगा. फिर भी अगर लगे कि पति को सुधारना है तो नीचे लिखे टिप्स आजमाए जा सकते हैं.   १. अगर पति दूसरी

हर साड़ी की एक कहानी होती है

हर साड़ी की एक कहानी होती है । पत्नी जी आज साड़ियां देख रही हैं । पत्नियां 500-1000 साड़ियों में रख देती हैं, और भूल जाती हैं । भूल जाना उनकी जमा योजना का

प्रेम पत्र

प्रिये याद आ गई तुम्हारी । कैसी हो ? मुझे पता है, अपने घर में अपने पापा के साथ, अपने भैया भाभी के साथ खुश ही होगी । सुबह चाय से बिस्कुट खा कर

जीवन की बगिया महकेगी

यादें जब मैं और बेटे की माँ बेटे को 2011 में इंजीनियरिंग हॉस्टल में छोड़ कर लौट रहे थे, तो कार में fm पर ‘जीवन की बगिया महकेगी …’ व ‘तुझे सूरज कहूँ या

माँ, तब तू बहुत सुंदर लगती थी

मैं तब छोटा था. गर्मी की छुट्टी में मों, पिताजी मेरे को लेकर लखनऊ से रात की पैसेंजर गाड़ी से अमेठी गावं जाते थे. रात तीन बजे गाड़ी पहुँच जाती थी. सुबह सुबह भोर

दो पल की खुशियाँ भी बड़ी होती है

खुशियों भरा जीवन अब मिलता है कहाँ, चैन-सुकून हर पल अब रहता है कहाँ, जिंदगी हर वक़्त लिए एक छड़ी होती है, इसलिए दो पल की खुशियाँ भी बड़ी होती है | संघर्ष ही जीवन

सुखी कैसे रहें

Despite a recent pickup in the job market and increase in salary levels, stress levels in India Inc are mounting as the performance standard is getting tougher and expectation higher. There is also constant pressure

कहाँ गये वो रिश्ते

हमारे घर से बाज़ार की दूरी कुल सौ मीटर होगी। मां शाम को सब्जी लेने जाती, तो मुहल्ले की चार महिलाएं साथ होतीं। घर में कभी किसी की जरा तबीयत खराब होती, तो दूर-दूर
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