Relationship Archive

मेरे फूफा

मेरी तीन बुआ । तीनों  प्यारी । बहुत प्यारी । और तीन फूफा । एक से बढ़ कर एक । (1) सरदार जोगिंदर सिंह ….खूबियाँ इतनी कि उँगलियों पर गिननी मुश्किल … खुदा ने रंगत बख्शी

मेरी बुआ

(1) जब मैंने लिखना सीखा ‘क ‘ माँ ने सिखाया ‘क’ से कमला …कमला मतलब मेरी बुआ । तीन बुआ में सबसे बड़ी । है भी बड़ी, बड़े दिल वाली, बेहद मीठी, शूगर कैण्डी।

माँ आसूं भर रह जाएगी

माँ, तुझे छोड़ मैं शहर चला जाता हूँ, बार बार, न जाने तू कैसे रहती होगी, बाबूजी हैं, भाई है, पर मैं तो नहीं । माँ, तेरी याद में – कल फिर वही कहानी

You are my best Friend

सच्चा मित्र वैसे तो हर पड़ोसी मित्र होता है, सामने से गुजरने वाला हर व्यक्ति मित्र होता है, हर फेसबुक मित्र, whatsapp मित्र, इंटरनेट मित्र भी मित्र होता है, समाज में हर कोई मित्र

माता पिता का आदर करें

सामाजिक बात अधिकतर घरेलू विवाद सम्मान को लेकर होते हैं । खासकर माता पिता का सम्मान । पति और पत्नी दोनों एक दूसरे के माता पिता को सम्मान दें । सम्मान न दे पाने

और, मैं उनमे समा गई, हमेशा के लिए !

कितने बरस बीत गए इस बात को … ये कैसी सब्जी उठा लाये आप ? आपको तो खरीदारी की ज़रा सी भी अक्ल नहीं है | बस .. इतना कहना था कि घर में

SORRY

SORRY एक लड़का था । 8वीं में । मेरे साथ । मेरे हॉस्टल बर्मिगटन हाल में । हम सब उसे बरेली कहते थे । असली नाम अब मैं भूल गया हूं । वो बात

शीलम हम तुम्हारी इज्जत करते हैं

शीलम बहुत ही संस्कारी लडकी थी और माता पिता के दिये संस्कारों के साथ वह क्लास वन से ग्रेजुएशन तक की पढाई करती रही और बीएड करके वह अध्यापक भी हो गयी। इक्कीसवीं सदी

वो बहुत भोली थी

वो बहुत भोली थी । छठी में मैं पढ़ता था. City Montessori School लखनऊ में. स्कूल अच्छा था और अपने बच्चों को स्कॉलरशिप की तैयारी करवाता था । मैंने भी स्कॉलरशिप की तैयारी की

मेरी बेटी मेरी खुशी है

जब मैं पीछे मुड़ कर देखता हूँ और खोजता हूँ खुशी कहां से आई, तो पाता हूँ कि खुशी बेटी से आई. बात पुरानी है. 16 साल पुरानी. तब हम संघर्ष कर रहे थे.
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