यादें Archive

Atal Darshan

कल अटल जी के लखनऊ से द्विवेदी जी का फोन आया और नम दिल से उन्होंने बताया कि वर्षों पहले, कैसे उन्होंने बतौर सामान्य कार्यकर्ता, मवैया के कार्यक्रम में दरियां बिछाईं व अटल जी

बॉलकनी वाला फ्लैट

वो जब मुंबई आई तो किराए का १ कमरे वाला फ्लैट था. मुम्बइया भाषा में कहें तो ‘टूटेला फूटेला’. बिस्तर बिछा दो तो मेज नहीं रख सकते, मेज रख दो बिस्तर नहीं आता. खैर,

इस बैग की एक कहानी है

इस बैग की एक कहानी है कहानी जून 2018 की है. कहानी ताजी है. लड़के के मम्मी पापा व लड़की की मम्मी पापा का बातचीत के लिए मिलना तय हुआ, 22 जून को. लड़के

गाँव की प्यारी बातें

गाँव की प्यारी बातें मैं आँख बंद किए खटिया पर लेटा था. सुबह के 8 बजे थे. छोटे भाई की पत्नी पूजा, धीमे धीमे किसी छोटे बच्चे से बात कर रही थी – भैया

50 ग्राम आइस क्रीम की अच्छी रातें

…. मैं सुबह साढ़े 5 बजे निकल जाता था. साईकल थी मेरे पास. सेकंड हैंड खरीदी थी अपने दोस्त के दोस्त से. साईकल से स्टेशन पहुंचता था. सब फिक्स था. मिनट मिनट फिक्स था.

हम अपने ही मायाजाल में फंस गए

हम अपने ही मायाजाल में फंस गए 😕 बात 1988 की है. बिरजू (मेरे स्कूल व कॉलेज वाले दोस्त Brijesh Singh) ने कहा – अरुण, मुंबई आ जाओ. कोई रास्ता निकल आएगा. पिताजी से

मूछों वाले मामा जी

मेरे मूछों वाले मामा जी तब मैं छोटा था । दूसरी तीसरी में पढ़ता था । समझने लगा था । तब की यादें आज भी जिंदा हैं । तब आप की उम्र 20 के

संग तुम्हारा लगा प्यारा

अनुज शाही, मेरा BITSian साथी है, एक बैच, एक हॉस्टल, एक बोली, एक साथ, लगातार चार साल । आज वो नॉएडा से मुंबई आया तो साल भर बाद मुलाकात हुई । बहुत बातें हुई

लिफ्ट में क्या हुआ

बात बहुत पर्सनल है, पर दोस्तों में क्या पर्सनल, सो बताए देते हैं 😊 मैं अपने स्कूल के दोस्त Anil से मिलने बड़ोदा गया । दोस्त गोरखपुर में रहते हैं । बड़ोदा आए थे

माँ से मिलन

माँ से मिलन … पता था कि बेटा आज आएगा । पता तो 10 दिन पहले से था पर आज माँ का मन नहीं लग रहा था । सुबह से छत पर खड़ी राह
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