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प्रेम !

प्रेम ! तुम्हे विस्तृत आकाश और धरा के मध्य वरण किया है मेरे हृदय ने प्रेम ! उषा काल में पवित्र सूर्य किरणों के नर्म स्पर्श में अनुभूत किया है मेरी देह ने प्रेम

कोलकाता यात्रा

कोलकाता यात्रा  कोलकाता शहर में साफ सफाई दिखी । होर्डिंग, बैनर व पोस्टर बहुत कम दिखे । जो भी पोस्टर वगैरा दिखे वो दीदी के थे । दीदी के अलावां किसी और की फोटो

Flexible होना अच्छा होता है

मैंने पिछले कुछ सालों में कुछ सीखने के प्रयास में कुछ सीखा है । जो सबसे महत्वपूर्ण बात सीखी है वह यह है कि मित्रता जरुरी है । हमें भावनात्मक बल चाहिए । यह

राजनैतिक मित्र को पत्र

मकरंद भाई, आप की बात अलग है. आप प्रत्यक्ष या परोक्ष राजनीति में एक्टिव हैं. इसलिए आपकी विचारधारा पुर्णतः किसी एक दल से बंधी होगी. चूँकि हम राजनीति में नहीं है इसलिए हम आप

हर साड़ी की एक कहानी होती है

हर साड़ी की एक कहानी होती है । पत्नी जी आज साड़ियां देख रही हैं । पत्नियां 500-1000 साड़ियों में रख देती हैं, और भूल जाती हैं । भूल जाना उनकी जमा योजना का

बहुत प्यारी हो तुम मीनू

किससे करें शिकायत हम दोनों एक दूसरे की 😊   मम्मी पापा से कर नहीं सकते, वो दुखी हो जाएंगे, खामखां । बात कोई गंभीर तो है नहीं, ये तो बस यूँ ही बात-बे-बात

प्रेम पत्र

प्रिये याद आ गई तुम्हारी । कैसी हो ? मुझे पता है, अपने घर में अपने पापा के साथ, अपने भैया भाभी के साथ खुश ही होगी । सुबह चाय से बिस्कुट खा कर

जीवन की बगिया महकेगी

यादें जब मैं और बेटे की माँ बेटे को 2011 में इंजीनियरिंग हॉस्टल में छोड़ कर लौट रहे थे, तो कार में fm पर ‘जीवन की बगिया महकेगी …’ व ‘तुझे सूरज कहूँ या

वे हमसे पहले चले गए

हम उन्हें लाने चले थे ट्रेन में ही थे 25 जून 2016 की तारीख थी सोच रहे थे कि पिताजी को अमेठी के गौरीगंज गावं से लाकर मुंबई में दवाई कराएं गे माँ ने

कुंभ की यादें

चार मई २०१६ की रात मैं, पत्नी व बेटी मुंबई से भोपाल के लिए अमृतसर एक्सप्रेस में सवार हो गए. उधर मामा मामी जी ने अमेठी से ट्रेन पकड़ी. माँ, पिताजी व मौसी जी
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