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अब मैं क्या करूँ

यह बड़ा प्रश्न है. जिंदगी में हर किसी के साथ ऐसा प्रश्न आता है. शिक्षा में अक्सर ऐसा प्रश्न अपनी पढाई पूरी करने के बाद आता है. शिक्षा के अलावां भी जिंदगी में कई

सुखी कैसे रहें

Despite a recent pickup in the job market and increase in salary levels, stress levels in India Inc are mounting as the performance standard is getting tougher and expectation higher. There is also constant pressure

तुम प्यार हो, सच

… दूर देखो, वो जो आखिरी पेड़ दिख रहा है, उधर जाना, उसके बगल में नदी है, नदी किनारे पत्थर है, उस पत्थर पर कोई बैठा है, वो मैं हूँ, और मैं जिस को

मुबारक ईद आयी है दुआ तो कीजिये…

यूँ तो माफीनामा हाज़िर है ले ही लीजिये, सजा कोई मुक़र्रर है तो दे ही दीजिये … खता मेरी अदा कुछ आप की भी कम न थी, ये गुस्सा छोड़ कर थोड़ा तो पानी

बेटा, मैं तो चित्रगुप्त हूं

कभी-कभी कोई मज़ाक या कोई चुटकुला सुन कर दिल रो पड़ता है। हालांकि लोग चुटकुला इसलिए सुनते और सुनाते हैं कि आदमी हंसे। पर कई दफा उसमें इतना तंज होता है कि आप हंसने

मेहनत की कमाई का सुख

“संजय, ये वाली जींस भी फेंक दूं क्या?” “नहीं, एक बार सूटकेस को फिर से तोलो, क्या पता अब सूटकेस का वज़न ठीक हो गया हो।” “पर मुझे लगता है कि अभी भी सूटकेस

शादी का लंहगा

मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि उसे जयपुर जाना है। “अचानक जयपुर क्यों?” “सलोनी की शादी तय हो गई है, इसलिए।” “तो, क्या सलोनी की शादी जयपुर में है?” “नहीं बाबा, शादी में पहनने

कहाँ गये वो रिश्ते

हमारे घर से बाज़ार की दूरी कुल सौ मीटर होगी। मां शाम को सब्जी लेने जाती, तो मुहल्ले की चार महिलाएं साथ होतीं। घर में कभी किसी की जरा तबीयत खराब होती, तो दूर-दूर

सुखी रहने का मंत्र

वर्तमान को जिएं पहले क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ, क्या गलती हुई … आदि पर बहुत अधिक न सोचें. इससे निगेटिव विचार उत्पन्न होतें हैं. निगेटिव उर्जा उत्पन्न होती है. यह शारीरिक व

विश्वकर्मा पूजा

जब छोटा था तब गावं के लोहार के काम को बड़े ध्यान से देखता था । सोचता था कि ये ऐसा कमाल कैसे कर लेता है । बढ़ई मेरे को गुल्ली डंडा बना कर
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