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यादें – मेरे जमशेद  की 

बात 1978 की है । जुलाई की । सातवीं सिटी मोंटेसरी लखनऊ से पास कर के bvm नैनीताल में आठवीं में गए थे । नई जगह थी । नई व्यवस्था थी । नया सिस्टम

अच्छे दिन आयेंगे

दुःख का समय छट जाएगा गम का समय कट जाएगा सूरज पूरब सेआएंगे आशा की लाली लाएंगे बारिश की बूंदे आएंगी खेती अपनी लहलाहेगी गीत खुशी के गाएंगे अच्छे दिन आयेंगे   आशावाद  

जीवन ज्ञान

एक देश है । ग्रीस । बहुत बड़ा । बहुत अमीर । सुना है कि कहता है कि bankrupt हो गया है । समाचार है कई दिनों बाद आज वहां बैंक खुलें गी ।

पहली बार

जब मैंने उसे पहली बार बहुत धीमे से छुआ था दिल तेजी से धड़का था और कुछ कुछ हुआ था चुप रहे, किसी को ना बताया तब कैसे क्या हुआ था जमाना, जाने कैसे

दुनिया इज्जत करेगी

आज के युवा को काम मांगने में शर्म आती है. कैसी शर्म भाई काम मांगना, भीख मांगने से बेहतर है. काम खुद चल कर नहीं आएगा. आप चलो, आगे बढ़ो और पकड़ लो. काम

साथ रहिये और मुस्कुराइये

मेरे पति ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया । पिछले दिनों मैं छत पर गई तो ये देख कर हैरान रह गई

दोस्त

दोस्त वह होता है जो आप के लिए ऐसा कुछ करे कि आप जिंदगी भर याद रखें । Brijesh Singh मेरा वैसा ही दोस्त है । मेरे साथ स्कूल में था । मेरे साथ कॉलेज में

धन नहीं, मन से मिलती हैं खुशियां

खुशियां पाने के लिये सभी अमीर होना चाहते हैं। सभी को खुशियों का राज कागज के नोटों के रहस्य में नजर आता है। इस दुनियां में सभी ज्यादा से ज्यादा धन कमाना चाहते हैं

मेरे फूफा

मेरी तीन बुआ । तीनों  प्यारी । बहुत प्यारी । और तीन फूफा । एक से बढ़ कर एक । (1) सरदार जोगिंदर सिंह ….खूबियाँ इतनी कि उँगलियों पर गिननी मुश्किल … खुदा ने रंगत बख्शी

पिज्जा – आठ टुकड़े खुशियों के

पत्नी ने कहा – आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना… पति- क्यों?? उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी… पति- क्यों?? पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने
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