कहानी Archive

ये मेरे हो गए

2016 के दिसंबर माह में कोलकाता से अपनी पत्नी के साथ लौटते वक्त ट्रेन में एक प्यारे से जोड़े की खूबसूरत जोड़ीदार से मैंने यूं ही पूछ लिया – ‘आप को इतना सीधा सादा

मेरी क्रिसमस

हरबती ने घर में आते ही रसोई का दरवाजा खोल दिया धूप अंदर आने के लिए…. धूप के साथ-साथ बाहर का शोर भी घर में आने लगा। हमारी सोसाइटी से जुड़ी दूसरी सोसाइटी के

हर खुशी की कीमत होती है

रूचि की यादें : फरीदाबाद शहर में मैं जिस जगह रहती हूँ वहाँ मिलता तो सब कुछ है आस-पास की दुकानों में पर बाज़ार जैसा नहीं है।बाज़ार जाने के लिए बीच रास्ते में एक

पंछी भी सिखाते हमें प्यार से रहना

ऐ सुन, ये दुनिया बड़ी न्यारी है इस दुनिया में, तू सबसे प्यारी है कुछ तो बोल, सोच क्या रही है मैं इधर हूँ यार, देख तू क्या रही है सोच रही हूँ कि

तुम प्यार हो, सच

… दूर देखो, वो जो आखिरी पेड़ दिख रहा है, उधर जाना, उसके बगल में नदी है, नदी किनारे पत्थर है, उस पत्थर पर कोई बैठा है, वो मैं हूँ, और मैं जिस को

बेटा, मैं तो चित्रगुप्त हूं

कभी-कभी कोई मज़ाक या कोई चुटकुला सुन कर दिल रो पड़ता है। हालांकि लोग चुटकुला इसलिए सुनते और सुनाते हैं कि आदमी हंसे। पर कई दफा उसमें इतना तंज होता है कि आप हंसने

मेहनत की कमाई का सुख

“संजय, ये वाली जींस भी फेंक दूं क्या?” “नहीं, एक बार सूटकेस को फिर से तोलो, क्या पता अब सूटकेस का वज़न ठीक हो गया हो।” “पर मुझे लगता है कि अभी भी सूटकेस

शादी का लंहगा

मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि उसे जयपुर जाना है। “अचानक जयपुर क्यों?” “सलोनी की शादी तय हो गई है, इसलिए।” “तो, क्या सलोनी की शादी जयपुर में है?” “नहीं बाबा, शादी में पहनने

कहाँ गये वो रिश्ते

हमारे घर से बाज़ार की दूरी कुल सौ मीटर होगी। मां शाम को सब्जी लेने जाती, तो मुहल्ले की चार महिलाएं साथ होतीं। घर में कभी किसी की जरा तबीयत खराब होती, तो दूर-दूर

तू बहन हमारी है, सबसे प्यारी है

दुनिया की मेरी सारी बहनो के लिए –   धागा तू बांध पाए या नहीं मन का धागा बंधा हुआ है तेरे प्यार दुलार में बहना एक एक मोती गुथा हुआ है तू खुश
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