कहानी Archive

अगर मैं कवी होता

अगर मैं कवी होता तो कविता लिखता नदी पे लिखता हवा पे लिखता बच्चों पे लिखता युवा पे लिखता धरती का, दुलार लिखता आसमां का, प्यार लिखता लिखता उसकी, आंखे गीली लिखता खेत की,

पिज्जा – आठ टुकड़े खुशियों के

पत्नी ने कहा – आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना… पति- क्यों?? उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी… पति- क्यों?? पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने

पिताजी, हम हमेशा आप पर गर्व करेंगे

मैं छोटा था, बहुत छोटा, नर्सरी में दाखिला नहीं हुआ था, गावं में रहता था, माँ, दादी और घर के दो बैल करन अर्जुन के साथ । उमर पांच साल । पिताजी शहर में

कैसे बना शिक्षक ?

इंजीनियरिंग करने के बाद एक छोटी से नौकरी कर रहा था. Software programmer था । एक दिन हेगड़े साहब ऑफिस आए । बात बात में बोले – अरे अरुण, तुमने तो Pascal programming पढ़ा

और, मैं उनमे समा गई, हमेशा के लिए !

कितने बरस बीत गए इस बात को … ये कैसी सब्जी उठा लाये आप ? आपको तो खरीदारी की ज़रा सी भी अक्ल नहीं है | बस .. इतना कहना था कि घर में

अब मैं खुश हूँ

एक गांव में एक बूढ़ा आदमी रहता था। उसके हिसाब से वो दुनिया के सबसे बदकिस्मत लोगों में से एक था । वो पूरे गांव से लगातार शिकायत करता था और हमेशा ही उदास

रघु के बाबा शहर में नौकरी करते हैं

रघु के बाबा शहर में नौकरी करते हैं. हर मैंने पैसा भेजते हैं. गावं में घर चल रहा है. बाबा को देखा तो पाता चला कि चौकीदारी करते हैं. दिन की शिफ्ट एक सोसाइटी

शीलम हम तुम्हारी इज्जत करते हैं

शीलम बहुत ही संस्कारी लडकी थी और माता पिता के दिये संस्कारों के साथ वह क्लास वन से ग्रेजुएशन तक की पढाई करती रही और बीएड करके वह अध्यापक भी हो गयी। इक्कीसवीं सदी

खुशियाँ बाँटें

शरद ऋतु की एक शाम। किशोरवय मंजरी अपने द्वार पर टहल रही थी। शाम की सुहानी हवा का आनंद लेते हुये उसे एक ख्याल आया। क्यों न वो अपने द्वार पर फूलों के पौधे

भावुक होली : सामाजिक प्यार

बात 5 तारीख की है । मुंबई से भोपाल पहुंचा । सुबह के 10 बज रहे थे । प्लेटफॉर्म 5 की तरफ से बाहर निकला । बहुत सारे ऑटो वाले खड़े थे । अधिकतर
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