Family Archive

मुलाकात

बात 1993 की है । मैं सेंट ज़ेवियर टेक्निकल इंस्टिट्यूट माहिम में प्रोफेसर था । शादी के बाद सुल्तानपुर से मुंबई आए पत्नी रेणु को दो चार माह हुए थे । रेणु ने बताया

हर साड़ी की एक कहानी होती है

हर साड़ी की एक कहानी होती है । पत्नी जी आज साड़ियां देख रही हैं । पत्नियां 500-1000 साड़ियों में रख देती हैं, और भूल जाती हैं । भूल जाना उनकी जमा योजना का

बेटा, मैं तो चित्रगुप्त हूं

कभी-कभी कोई मज़ाक या कोई चुटकुला सुन कर दिल रो पड़ता है। हालांकि लोग चुटकुला इसलिए सुनते और सुनाते हैं कि आदमी हंसे। पर कई दफा उसमें इतना तंज होता है कि आप हंसने

कहाँ गये वो रिश्ते

हमारे घर से बाज़ार की दूरी कुल सौ मीटर होगी। मां शाम को सब्जी लेने जाती, तो मुहल्ले की चार महिलाएं साथ होतीं। घर में कभी किसी की जरा तबीयत खराब होती, तो दूर-दूर

तू बहन हमारी है, सबसे प्यारी है

दुनिया की मेरी सारी बहनो के लिए –   धागा तू बांध पाए या नहीं मन का धागा बंधा हुआ है तेरे प्यार दुलार में बहना एक एक मोती गुथा हुआ है तू खुश

साथ रहिये और मुस्कुराइये

मेरे पति ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया । पिछले दिनों मैं छत पर गई तो ये देख कर हैरान रह गई

पिताजी, हम हमेशा आप पर गर्व करेंगे

मैं छोटा था, बहुत छोटा, नर्सरी में दाखिला नहीं हुआ था, गावं में रहता था, माँ, दादी और घर के दो बैल करन अर्जुन के साथ । उमर पांच साल । पिताजी शहर में

मेरी बुआ

(1) जब मैंने लिखना सीखा ‘क ‘ माँ ने सिखाया ‘क’ से कमला …कमला मतलब मेरी बुआ । तीन बुआ में सबसे बड़ी । है भी बड़ी, बड़े दिल वाली, बेहद मीठी, शूगर कैण्डी।

और, मैं उनमे समा गई, हमेशा के लिए !

कितने बरस बीत गए इस बात को … ये कैसी सब्जी उठा लाये आप ? आपको तो खरीदारी की ज़रा सी भी अक्ल नहीं है | बस .. इतना कहना था कि घर में

पति को प्यार करें

शादी होने के कुछ सालों तक सब अच्छा चलता है. एक दूसरे को समझते हैं. प्यार करते हैं. पर धीमे धीमे यह प्यार कम होता जाता है और रोजमर्रा की घरेलू परेशानियाँ हावी होने
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