Memoirs Archive

सिद्धेश जी से मुलाकात

Siddhesh Dubey जी से उनके लखनऊ वाले निवास स्थान पर मुलाकात हुई । बहुत सीधे सरल सामाजिक व्यक्ति हैं । अगर असली बात नही बताऊंगा तो बात अधूरी रहेगी, इसलिए आप सब को असली बात

Love you Sambhav

इस चित्र में जो सबसे छोटा बच्चा है, जिसका मैं फूफा हूँ, उसका नाम “संभव” है । आज मैं संभव से लखनऊ में मिला । संभव से हुई बातचीत सुनिए – – तुम बहुत

आप ने हमारे लिए किया ही क्या है

मैं संपर्क क्रांति ट्रेन में बैठा हूँ । ट्रेन दिल्ली से काठगोदाम जा रही है । सभी यात्री अपने आप में खोए हैं । कोई मोबाइल में वीडियो देख रहा है । कोई इयरफोन

मुक्ता तुम्हे आशीर्वाद

चार साल पहले की बात है । एक लड़की मेरे ऑफिस आई । वह icici बैंक में काम करती थी । इंस्टीट्यट व कॉलेजों के एकाउंट खुलवाने व सम्बंधित बिजनेस प्रमोशन का काम था

आज़ादी की लड़ाई में खुल कर कूद गए

वयोवृद्ध सम्मानीय शुक्ला जी बता रहे थे – अंग्रेजों ने चंद्रशेखर आज़ाद जी पर ईनाम घोषित कर दिया था । हमारे गाँव से वे जा रहे थे । गाँव की काकी पहचान गई ।

और वो चला गया

जिस की कहानी लिख रहे हों वो अगर सामने बैठा हो, और कहानी स्वयं सुना रहा हो, और उसकी आवाज कांप रही हो, और आंखें नम हों, तो यकीन मानिए, कलम कांपती है, बार

Atal Darshan

कल अटल जी के लखनऊ से द्विवेदी जी का फोन आया और नम दिल से उन्होंने बताया कि वर्षों पहले, कैसे उन्होंने बतौर सामान्य कार्यकर्ता, मवैया के कार्यक्रम में दरियां बिछाईं व अटल जी

गाँव की प्यारी बातें

गाँव की प्यारी बातें मैं आँख बंद किए खटिया पर लेटा था. सुबह के 8 बजे थे. छोटे भाई की पत्नी पूजा, धीमे धीमे किसी छोटे बच्चे से बात कर रही थी – भैया

50 ग्राम आइस क्रीम की अच्छी रातें

…. मैं सुबह साढ़े 5 बजे निकल जाता था. साईकल थी मेरे पास. सेकंड हैंड खरीदी थी अपने दोस्त के दोस्त से. साईकल से स्टेशन पहुंचता था. सब फिक्स था. मिनट मिनट फिक्स था.