Mother Archive

माँ, तब तू बहुत सुंदर लगती थी

मैं तब छोटा था. गर्मी की छुट्टी में मों, पिताजी मेरे को लेकर लखनऊ से रात की पैसेंजर गाड़ी से अमेठी गावं जाते थे. रात तीन बजे गाड़ी पहुँच जाती थी. सुबह सुबह भोर

अगर मैं कवी होता

अगर मैं कवी होता तो कविता लिखता नदी पे लिखता हवा पे लिखता बच्चों पे लिखता युवा पे लिखता धरती का, दुलार लिखता आसमां का, प्यार लिखता लिखता उसकी, आंखे गीली लिखता खेत की,
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