Relationship Archive

बेचारा आदमी

बेचारा आदमी गौरीगंज, अमेठी के गांव से मुंबई में आकर आदमी काम करने लगा । शादी हो गई । बच्चे हो गए । स्थिरता के लिए उसने फ्लैट ले लिया । एक दूकान ले

मुलाकात

बात 1993 की है । मैं सेंट ज़ेवियर टेक्निकल इंस्टिट्यूट माहिम में प्रोफेसर था । शादी के बाद सुल्तानपुर से मुंबई आए पत्नी रेणु को दो चार माह हुए थे । रेणु ने बताया

पति को कैसे सुधारें

प्रश्न बहुत कठिन है. कौन किसे सुधारे, यही तय करना कठिन होगा. फिर भी अगर लगे कि पति को सुधारना है तो नीचे लिखे टिप्स आजमाए जा सकते हैं.   १. अगर पति दूसरी

ये मेरे हो गए

2016 के दिसंबर माह में कोलकाता से अपनी पत्नी के साथ लौटते वक्त ट्रेन में एक प्यारे से जोड़े की खूबसूरत जोड़ीदार से मैंने यूं ही पूछ लिया – ‘आप को इतना सीधा सादा

हर साड़ी की एक कहानी होती है

हर साड़ी की एक कहानी होती है । पत्नी जी आज साड़ियां देख रही हैं । पत्नियां 500-1000 साड़ियों में रख देती हैं, और भूल जाती हैं । भूल जाना उनकी जमा योजना का

समाज प्रेम को स्वीकार करे

खबरें समाज, परिवार व रिश्तों पर चिंतन करने को मजबूर करतीं हैं। खबरें परिवर्तन करने को चीखती चिल्लाती है। खबरें कहतीं हैं कि अब हठ त्याग दो और समय के अनुसार कुछ तो परिवर्तन

तुम प्यार हो, सच

… दूर देखो, वो जो आखिरी पेड़ दिख रहा है, उधर जाना, उसके बगल में नदी है, नदी किनारे पत्थर है, उस पत्थर पर कोई बैठा है, वो मैं हूँ, और मैं जिस को

कहाँ गये वो रिश्ते

हमारे घर से बाज़ार की दूरी कुल सौ मीटर होगी। मां शाम को सब्जी लेने जाती, तो मुहल्ले की चार महिलाएं साथ होतीं। घर में कभी किसी की जरा तबीयत खराब होती, तो दूर-दूर

तू बहन हमारी है, सबसे प्यारी है

दुनिया की मेरी सारी बहनो के लिए –   धागा तू बांध पाए या नहीं मन का धागा बंधा हुआ है तेरे प्यार दुलार में बहना एक एक मोती गुथा हुआ है तू खुश

साथ रहिये और मुस्कुराइये

मेरे पति ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया । पिछले दिनों मैं छत पर गई तो ये देख कर हैरान रह गई
Share