सुखी रहने का मंत्र

वर्तमान को जिएं

पहले क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ, क्या गलती हुई … आदि पर बहुत अधिक न सोचें. इससे निगेटिव विचार उत्पन्न होतें हैं. निगेटिव उर्जा उत्पन्न होती है. यह शारीरिक व मानसिक अवस्था खराब करती है. कई लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं. इससे सुख की बजाय आप दुःख की तरफ जा सकते हैं.
 
भविष्य में क्या होगा, कब होगा, कैसे होगा, क्या करेंगे … आदि पर भी बहुत अधिक न सोचें. इससे आप अति चिंतित हो सकते हैं. जो हुआ ही नहीं है उसकी कल्पना कर कर के आप परेशान हो सकते हैं. ब्लड प्रेशर बिगड़ सकता है. अगर आप चिंता की बात सोच रहे हैं तो BP बढ़ सकता है. शरीर व मन को तकलीफ दे सकता है. इससे सुख की बजाय आप दुःख की तरफ जा सकते हैं.
 

फिर क्या करें 

वर्तमान को जिएं. जो हो गया सो हो गया. उस पर जादा चिंतन न करें. जो होना है सो होना है. उस पर भी बहुत चिंतन न करें. हो सके तो, कल के लिए थोड़ा संचय करते हुए, जो भी आप के पास है उसका आप आज भोग करें. उसका आनंद लें. ‘रुखी सुखी खाय के ठंडा पानी पीउ …. ‘ यहीं आप का सुख छिपा है. अगर आप के पास साइकिल है तो उस पर शान से चलें, कल जब बाइक होगी तो उसपर भी शान से चलना, और परसो जब कार आएगी तब उस पर भी शान से  बैठना. नहीं आएगी तो कोई बात नहीं. आप के लिए 50 लाख की बस सरकार ने बस डिपो में खड़ी की है और करोड़ों की ट्रेन रेलवे स्टेशन पर है. काहे की चिंता. 🙂 एक अंदर की बात बता दूँ, बाइक और कार केवल दिखावा है, इससे लोग दुखी जादा हुए हैं, खुश कम. 🙂 इसलिए आज को जिएं. सब के साथ. खुश होकर. प्यार से जिएं.
 

चलते चलते

पत्नी से मैंने पूछा कि तुम्हे महंगी साड़ी चाहिए या सस्ती. वो बोली कि “प्यार से जो भी दोगे, अच्छी लगेगी. सस्ती और हलकी होगी तो मैं रोज पहन पाउंगी, महंगी होगी तो एक दिन किसी प्रोग्राम में पहन कर आलमारी में रख उठेगी और जाने फिर कब उसका नंबर आएगा. अब आप समझ लो”. मैं समझ गया. प्यार सस्ते महंगे में नहीं है. प्यार उपहार में हैं. और सुख प्यार में है.
 

अंत में

वर्तमान को जिएं. खुशी के कारण उत्पन्न करें. खुशी से मन स्वस्थ रहेगा. तन भी स्वस्थ रहेगा. सुख उत्पन्न होगा. सुख बढ़ेगा.