स्नेहा के पापा ने समझाया

स्नेहा के पापा ने समझाया कि

If you judge people, no-one is yours. If you understand people, everyone is yours.

अगर आप लोगों को जज करेंगे, तो आप किसी को अपना नही बना पाएँगे, अगर आप उन्हें समझेंगे तो, वो आपके बन जाएंगे और आप उनके बन जाएंगे.

स्नेहा के पापा की बात सार्थक है, समझने और अपनाने वाली है.

हममें से कई लोग इसी जजमेंटल वाली समस्या के पीड़ित हैं. शुक्ला जी ने दीक्षित जी को फोन किया, अपनी कन्या के रिश्ते के लिए, सात मिनट की बात में दीक्षित जी ने जज कर लिया कि शुक्ला जी कैसे हैं ? बात शुरू होने से पहले ही बंद हो गई. ऐसा ही अवस्थी जी ने शर्मा जी व उनके लड़के के बारे में जज कर लिया था और बात शुरू होने से पहले ही बंद हो गई थी ?

जज करना छोड़िए, समझना शुरू कीजिए. समझने के लिए एक दूसरे को जानना पड़ेगा. जानने के लिए बात चीत मेल मिलाप करना पड़ेगा. इसमें सात महीने लग सकते हैं, जल्दी करेंगे तो भी सात हफ्ते लग जाएंगे, अति शीघ्रता दिखाएंगे तो भी सात दिन तो लग ही जाएंगे, पर यह मान कर चलिए कि सात घंटे या सात मिनट में तो कोई किसी को नही समझ सकता, भले ही वो कितना बड़ा प्रकाण्ड पंडित हो ?

समय दीजिए, एक दूसरे को समझिए, समधी समधी समधन समधन वर कन्या मिल जाएंगे तो रिश्ते बन ही जाएंगे ??

आप सभी स्नेहा के पापा जी को धन्यवाद कहिए जिन्होंने इतनी सुंदर बात समझाई.

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