कहानी Archive

अब मैं खुश हूँ

एक गांव में एक बूढ़ा आदमी रहता था। उसके हिसाब से वो दुनिया के सबसे बदकिस्मत लोगों में से एक था । वो पूरे गांव से लगातार शिकायत करता था और हमेशा ही उदास

रघु के बाबा शहर में नौकरी करते हैं

रघु के बाबा शहर में नौकरी करते हैं. हर मैंने पैसा भेजते हैं. गावं में घर चल रहा है. बाबा को देखा तो पाता चला कि चौकीदारी करते हैं. दिन की शिफ्ट एक सोसाइटी

शीलम हम तुम्हारी इज्जत करते हैं

शीलम बहुत ही संस्कारी लडकी थी और माता पिता के दिये संस्कारों के साथ वह क्लास वन से ग्रेजुएशन तक की पढाई करती रही और बीएड करके वह अध्यापक भी हो गयी। इक्कीसवीं सदी

खुशियाँ बाँटें

शरद ऋतु की एक शाम। किशोरवय मंजरी अपने द्वार पर टहल रही थी। शाम की सुहानी हवा का आनंद लेते हुये उसे एक ख्याल आया। क्यों न वो अपने द्वार पर फूलों के पौधे

भावुक होली : सामाजिक प्यार

बात 5 तारीख की है । मुंबई से भोपाल पहुंचा । सुबह के 10 बज रहे थे । प्लेटफॉर्म 5 की तरफ से बाहर निकला । बहुत सारे ऑटो वाले खड़े थे । अधिकतर