Relationship Archive

हर साड़ी की एक कहानी होती है

हर साड़ी की एक कहानी होती है । पत्नी जी आज साड़ियां देख रही हैं । पत्नियां 500-1000 साड़ियों में रख देती हैं, और भूल जाती हैं । भूल जाना उनकी जमा योजना का

समाज प्रेम को स्वीकार करे

खबरें समाज, परिवार व रिश्तों पर चिंतन करने को मजबूर करतीं हैं। खबरें परिवर्तन करने को चीखती चिल्लाती है। खबरें कहतीं हैं कि अब हठ त्याग दो और समय के अनुसार कुछ तो परिवर्तन

तुम प्यार हो, सच

… दूर देखो, वो जो आखिरी पेड़ दिख रहा है, उधर जाना, उसके बगल में नदी है, नदी किनारे पत्थर है, उस पत्थर पर कोई बैठा है, वो मैं हूँ, और मैं जिस को

कहाँ गये वो रिश्ते

हमारे घर से बाज़ार की दूरी कुल सौ मीटर होगी। मां शाम को सब्जी लेने जाती, तो मुहल्ले की चार महिलाएं साथ होतीं। घर में कभी किसी की जरा तबीयत खराब होती, तो दूर-दूर

तू बहन हमारी है, सबसे प्यारी है

दुनिया की मेरी सारी बहनो के लिए –   धागा तू बांध पाए या नहीं मन का धागा बंधा हुआ है तेरे प्यार दुलार में बहना एक एक मोती गुथा हुआ है तू खुश

साथ रहिये और मुस्कुराइये

मेरे पति ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया । पिछले दिनों मैं छत पर गई तो ये देख कर हैरान रह गई

माता पिता का आदर करें

सामाजिक बात अधिकतर घरेलू विवाद सम्मान को लेकर होते हैं । खासकर माता पिता का सम्मान । पति और पत्नी दोनों एक दूसरे के माता पिता को सम्मान दें । सम्मान न दे पाने

और, मैं उनमे समा गई, हमेशा के लिए !

कितने बरस बीत गए इस बात को … ये कैसी सब्जी उठा लाये आप ? आपको तो खरीदारी की ज़रा सी भी अक्ल नहीं है | बस .. इतना कहना था कि घर में

SORRY

SORRY एक लड़का था । 8वीं में । मेरे साथ । मेरे हॉस्टल बर्मिगटन हाल में । हम सब उसे बरेली कहते थे । असली नाम अब मैं भूल गया हूं । वो बात

शीलम हम तुम्हारी इज्जत करते हैं

शीलम बहुत ही संस्कारी लडकी थी और माता पिता के दिये संस्कारों के साथ वह क्लास वन से ग्रेजुएशन तक की पढाई करती रही और बीएड करके वह अध्यापक भी हो गयी। इक्कीसवीं सदी